Monday, November 5, 2012

Ganga ki Kashi (The Banaras Series)




कइयो के लिए अचरज है
कुछ के लिए तमाशा है
माँ बुलाते है लोग 
ऐसा इस नदी में क्या है 

भाषाओं में भेद है 
तमिल तेलगु कन्नड़ 
बांगला हिंदी 
भाषाएँ अनेक है 
पर गंगा सब में माँ है 
एक डूबकी की इच्छा है 

हमें भी चाहिए 
जरा सी 
गंगा की काशी 

: शशिप्रकाश सैनी 

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