Saturday, April 18, 2015
Saturday, May 24, 2014
Friday, April 4, 2014
Monday, February 17, 2014
Saturday, February 1, 2014
Wednesday, January 22, 2014
Monday, January 6, 2014
चलना हो तो साथ चलो
चलना हो तो साथ चलो
पीछे इतना कौन तके
आगे किसने देखा हैं
हाथों में कर हाथ चलो
चलना हो तो साथ चलो
: शशिप्रकाश सैनी
//मेरा पहला काव्य संग्रह
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यहाँ Free ebook में उपलब्ध
Tuesday, December 31, 2013
सिंह द्वार - ज्ञान की गंगोत्री
ये गंगोत्री हैं, जी हाँ आपने सही सुना गंगोत्री, ज्ञान की गंगोत्री, वैसे तो ये बनारस हिंदू युनिवर्सिटी का सिंह द्वार हैं, पर इसे ज्ञान की गंगोत्री कहना जरा भी अतिशयोक्ति नहीं |
यहाँ पे न जाने कितनी ही बुँदे आई, ज्ञान अर्जित किया, महामना का आशिर्वाद पाया और धाराएं,और नदी बन ज्ञान के महासागर में मिलती गई, देश विदेशो में अपना योगदान करती गई |
अब बताइए क्या सिंह द्वार को ज्ञान की गंगोत्री कहना आपको अतिशयोक्ति लगा !
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Monday, December 30, 2013
Assi Ghat Varanasi
न जाने कितने सूरज ऊगते हुए देखे यहाँ
चाँद के सफर के भी गवाह रहे
चाँद के सफर के भी गवाह रहे
अस्सी से लंबा रिश्ता हैं हमारा
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Tuesday, December 24, 2013
इस राह अब कोई भीड़ नहीं आती
सड़क पे पड़ी पत्तियां बताती हैं
इस राह अब कोई भीड़ नहीं आती
हवाएं आज भी चलती, टहनियाँ हिलाती
अमौरी तोड़ने अब बच्चे नहीं आते
पुराने लोग कहते हैं, कभी रौनक
यहाँ भी थी
आज कोई हैं तो एक भूली हुई काकी
: शशिप्रकाश सैनी
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Wednesday, December 18, 2013
Tuesday, December 17, 2013
पनघट पे घट, गंगा का तट
भरने बुँदे विश्वास की
गर मान सको तो अमृत हैं
प्यास अंतिम उच्छ्वास की
: शशिप्रकाश सैनी
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Monday, December 2, 2013
नया दिन, नया सूरज
नया दिन
नया सूरज
नई आश
रात के निशाना मिटाता
नया अध्याय लिखने को
नया विषय
नया पटल
नया आकाश
: शशिप्रकाश सैनी
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Wednesday, November 27, 2013
Tuesday, November 26, 2013
बुढिया के बाल (Cotton Candy)
जब देखू बुढिया के बाल
मुह मेरा भी टपकाए लार
बड़प्पन की छोड़ चाल
मैं दौड़ा चला आता हूँ
बुढिया के बाल पाते ही
मैं बच्चा हो जाता हूँ
: शशिप्रकाश सैनी
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Monday, November 18, 2013
Sunday, November 10, 2013
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