Saturday, May 24, 2014

नाव रोटी भी, आशियाना भी


एक नाविक के लिए 
उसकी नाव रोटी भी हैं 
और आशियाना भी 

Monday, February 17, 2014

सूर्य कि उपासना करता ब्राह्मण



सूर्य कि उपासना करता ब्राह्मण, चेत सिंह घाट, बनारस में 

Saturday, February 1, 2014

Mahadev & Nandi


काल हर, कष्ट हर 
रोग हर, शोक हर
दुख हर, दरिद्र हर

ॐ नमः शिवाय, हर हर महादेव 

Wednesday, January 22, 2014

Zorba the Budhha @Ghitorni, Delhi



ये नजारा देख के लगता नहीं ये देश की राजधानी दिल्ली में हो सकता हैं, 
पर हैं तो ये दिल्ली में ही घिटोरनी में |

Monday, January 6, 2014

चलना हो तो साथ चलो



चलना हो तो साथ चलो
पीछे इतना कौन तके
आगे किसने देखा हैं
हाथों में कर हाथ चलो 
चलना हो तो साथ चलो


: शशिप्रकाश सैनी


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Tuesday, December 31, 2013

सिंह द्वार - ज्ञान की गंगोत्री


ये गंगोत्री हैं, जी हाँ आपने सही सुना गंगोत्री, ज्ञान की गंगोत्री, वैसे तो ये बनारस हिंदू  युनिवर्सिटी का सिंह द्वार हैं, पर इसे ज्ञान की गंगोत्री कहना जरा भी अतिशयोक्ति नहीं |

यहाँ पे न जाने कितनी ही बुँदे आई, ज्ञान अर्जित किया, महामना का आशिर्वाद पाया और धाराएं,और नदी बन ज्ञान के महासागर में मिलती गई, देश विदेशो में अपना योगदान करती गई |

अब बताइए क्या सिंह द्वार को ज्ञान की गंगोत्री कहना आपको  अतिशयोक्ति लगा !


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Monday, December 30, 2013

Assi Ghat Varanasi


न जाने कितने सूरज ऊगते हुए देखे यहाँ
चाँद के सफर के भी गवाह रहे
अस्सी से लंबा रिश्ता हैं हमारा


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Tuesday, December 24, 2013

साईकिलए पे मोटर साईकिल का मजा


साईकिलए पे मोटर साईकिल का मजा
ओफ्हो
बिना तेले के उड़त जा रजा
ओफ्हो

(रफीक शादानी की इस्टाइल मा)

Bael Fruit (बेइल फल)



Bael (Aegle marmelos), also known as Bengal quince, Golden apple, Stone apple, Wood apple, bili, is a species of tree native to India.

इस राह अब कोई भीड़ नहीं आती



सड़क पे पड़ी पत्तियां बताती हैं
इस राह अब कोई भीड़ नहीं आती
हवाएं आज भी चलती, टहनियाँ हिलाती
अमौरी तोड़ने अब बच्चे नहीं आते
पुराने लोग कहते हैं, कभी रौनक यहाँ भी थी
आज कोई हैं तो एक भूली हुई काकी


: शशिप्रकाश सैनी 


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Wednesday, December 18, 2013

एक घोसला ऐसा भी


एक घोसला ऐसा भी
घर से बेहतर क्या कोई जगह हो सकती हैं भला !

Tuesday, December 17, 2013

पनघट पे घट, गंगा का तट




पनघट पे घट, गंगा का तट
भरने बुँदे विश्वास की
गर मान सको तो अमृत हैं
प्यास अंतिम उच्छ्वास की 

: शशिप्रकाश सैनी


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सूरज का स्वागत



सूरज का स्वागत, बनारस के घाटों पे गंगा के साथ

Monday, December 2, 2013

नया दिन, नया सूरज


नया दिन 
नया सूरज 
नई आश
रात के निशाना मिटाता
नया अध्याय लिखने को
नया विषय
नया पटल
नया आकाश

: शशिप्रकाश सैनी 


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Wednesday, November 27, 2013

लगत लेट हो गईला स्कूल बदे


लगत लेट हो गईला स्कूल बदे 
तनिक जोर जोर पैडल मारा 

Tuesday, November 26, 2013

बुढिया के बाल (Cotton Candy)



जब देखू बुढिया के बाल
मुह मेरा भी टपकाए लार
बड़प्पन की छोड़ चाल
मैं  दौड़ा चला आता हूँ
बुढिया के बाल पाते ही
मैं बच्चा हो जाता हूँ

: शशिप्रकाश सैनी

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